हरिद्वार आने वाले लाखों श्रद्धालुओं ने एक ऐसे इंसान को जरूर देखा होगा, जो साधारण कपड़ों में, चेहरे पर मुस्कान लिए सिर्फ एक ही बात कहता था—”बाबूजी, भंडारा कर दो।”
ये थे रमाशंकर गुप्ता, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, साधु-संतों और बेसहारा लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। वे खुद अमीर नहीं थे, लेकिन लोगों को प्रेरित करते थे कि यदि संभव हो तो किसी भूखे के लिए भंडारा करवा दें।
कई वर्षों तक हरिद्वार के घाटों पर उनकी आवाज लोगों के लिए सेवा और मानवता की पहचान बन गई। उनकी अपील पर अनगिनत लोगों ने भोजन वितरण कराया और हजारों जरूरतमंदों का पेट भरा।
अब खबर है कि रमाशंकर गुप्ता का निधन हो गया है। उनके जाने से हरिद्वार ने एक ऐसा चेहरा खो दिया, जो बिना किसी स्वार्थ के केवल सेवा का संदेश देता था।
उनकी पहचान किसी बड़े पद या दौलत से नहीं थी, बल्कि मानवता, करुणा और सेवा से थी। यही वजह है कि आज हजारों लोग उन्हें भावुक होकर याद कर रहे हैं।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति। 🙏🕉️
*हरिद्वार के घाटों पर अब कभी नहीं गूंजेगी…”बाबूजी भंडारा कर दो” की वह मासूम आवाज।*
