*महिला काव्य मंच रुड़की इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी दीप रेजीडेंसी होटल में अत्यंत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में श्री स्वराज गोयल के परिवार और महिला काव्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई।*

महिला काव्य मंच
रुड़की इकाई
मासिक काव्य गोष्ठी
दिनांक 30 अगस्त

महिला काव्य मंच रुड़की इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी दीप रेजीडेंसी होटल में अत्यंत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में श्री स्वराज गोयल के परिवार और महिला काव्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। गोष्ठी के साथ ही आठवीं कक्षा की छात्रा निमिषा गोयल द्वारा लिखित पुस्तक रियलाइजेशन तथा महिला काव्य मंच के शीघ्र प्रकाशित होने वाले साझा कविता संग्रह “स्त्री – मन धूप छांही रंग” के पोस्टर का विमोचन भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम डॉक्टर आनन्द भारद्वाज जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। पत्नी के ऊपर रचित उनकी कविता को बहुत सराहा गया। मुख्य वक्ता सुबोध कुमार पुंडीर सरित जी ने रियलाइजेशन पुस्तक पर विस्तृत वक्तव्य प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि श्री गोपाल नारसन जी रहे और विशिष्ट अतिथि श्री पंकज गर्ग ने माहिया और गीतों की प्रस्तुति से समा बांध दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मृणालिनी शर्मा जी और शाहिदा शेख जी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना हुई। अर्चना त्यागी (अध्यक्ष) और ममता चंद्रा जी के संचालन में काव्य गोष्ठी की शुरुआत वीना सिंह जी ने मानसून में पड़ने वाले त्यौहार जैसे रक्षाबंधन ,जन्माष्टमी आदि का बहुत ही मोहक अंदाज में उल्लेख किया। श्रद्धा हिंदू की कविता पाया तो तुझे बूंद सा प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति रही। रमा गुप्ता जी की कविता रख सको तो रख लो एक निशानी हूं मैं अपने अस्तित्व का अहसास कराती एक भावपूर्ण प्रस्तुति थी।निधि जी ने अपने शहर कोलकाता से अपनी कविता के द्वारा हम सब का परिचय कराया, कविता जी अपनी रचना में अपनी किसी भी उपलब्धि का गुरुर न करने का संदेश दिया, अर्चना जी ने अपनी कविता में अपने प्रिय से आग्रह किया कि वह हमेशा उनके मन की बात को सुनते और समझते रहें, मृणालिनी शर्मा जी की कविता मन के आंगन में कितना शोर है, दिल को छू गई। ममता चंद्रा जी की कविता तेरे इंतजार में को श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली।बुशरा जी की कविता उनकी बहन अजरा जी ने प्रस्तुत की जिसमें स्त्री की तुलना प्राकृतिक की बैलों से की जोअपनी उन्नति के लिये किसी का सहारा ढूंढती हैं , शाहिदा शेख जी ने बारिश के मौसम में बचपन के खेलों की याद दिला दी। अलका घनशला जी ने अपनी कविता में शहीदों की मानस स्थिति व उनके परिवारों के दुख को बहुत ही मार्मिक शब्दों में अपने गायन द्वारा प्रस्तुत किया।सहारनपुर से पधारी सूफिया जैदी जी ने बेटियों के वह सपने जो चार दिवारी में घुट कर रह जाते हैं उनका अपने शब्दों में मार्मिक वर्णन किया। मधु शर्मा जी ने ऑडियो मैसेज में अपनी कविता भेजकर कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अंत में महिला मंच की सक्रिय सदस्य अलका घनशाला जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। श्रद्धा हिंदू द्वारा शांति पाठ सर्वे भवन्तु सुखिन के समय सभी ने खड़े होकर सहयोग दिया।निमिषा गोयल के परिवार की और से सूक्ष्म स्वादिष्ट जलपान उपलब्ध कराया गया।

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