27 सितंबर 2026
नारी अस्मिता के जून ,जुलाई, अगस्त अंक का विमोचन समारोह संपन्न हुआ।
नारी अस्मिता पत्रिका कहानी विशेषांक विमोचन , विचार विमर्श समारोह ऑनलाइन आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षा गीतांजलि चटर्जी तथा मुख्य अतिथि डॉक्टर दुर्गा सिन्हा “उदार’ व डॉ इंदु झुनझुनवाला रही।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन अर्चना त्यागी ने किया जो कि इस पत्रिका के इस अंक की अतिथि संपादक भी है ,इनका साथ दिया तूलिका श्री ने।
अर्चना त्यागी जी द्वारा दिए गए अतिथि परिचय साथ
कार्यक्रम की शुरुआत हुई।तूलिका श्री के द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों, वक्ताओं, लेखिकाओं की उपस्थिति में पत्रिका का मुख पृष्ठ मोबाइल स्क्रीन पर एक साथ प्रदर्शित कर पत्रिका का विमोचन किया गया।
पत्रिका की समीक्षक
तूलिका श्री ने पत्रिका की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया । 1994 से प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका स्त्रियों के मन को मजबूती प्रदान करने में सक्षम रही है। आज देश और विदेश दोनों में इस पत्रिका ने अपनी पहचान बना ली है।
प्रधान संपादक रचना निगम के द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं तथा लेखिकाओं के स्वागत के बाद आमंत्रित वक्ताओं के द्वारा विशेषांक में से चुनी गई कहानियों पर प्रस्तुत समीक्षाओं को सुनकर पाठक का मन स्वत: ही कहानियों की ओर आकर्षित हो जाता है। सुंदर, सटीक, सार्थक समीक्षा का दौर तीन घंटे तक चलता रहा ।
1 मनवीन कौर–जिन्होंने उम्मीद ,मोहभंग, भोर का उजाला पर अपनी उत्कृष्ट समीक्षा के साथ समालोचनात्मक आकलन भी प्रस्तुत किया।
2 उर्मिला पचीसिया– होठों पर हंसी आंखों में पानी, वीरांगना, तुम सक्षम हो माही की बेहतरीन शब्दों में मर्म को समझते हुए समीक्षा प्रस्तुत की।
3 बसंती पवार–भूल ,शक, मुंह दिखाई कहानियों के कथानक पर बखूबी समीक्षक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
इसी बीच मुख्य अतिथि इंदू झुनझुनवाला ने स्त्री विमर्श व सशक्तिकरण को व्याख्यायित कर प्रधान संपादक रचना निगम को पत्रिका के लिए शुभकामनाएं व धन्यवाद प्रेषित किया।
4 रश्मि मेहता–तुरपाई, सुहागन ,समंदर मंथन कहानी पर उन्नत विचारों के साथ अपनी समीक्षा प्रस्तुत की।
5 डॉ कमल प्रभा कपानी –कैक्टस के फूल,उस क्षण की परछाई,अभिशप्त मैं नहीं तुम उक्त कहानियों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए तथा पटल को उसकी उन्नत कार्य के लिए बधाई प्रेषित की।
इसके बाद सुमिता नारवाल ने चित्रकार के रूप में पत्रिका के साथ जुड़ने के अपने सफ़र को साझा किया। इन्होंने पत्रिका की संपूर्ण कहानियों को अपने रेखाचित्रों से सजाया है तथा विशेषांक सार्थक समीक्षा भी लिखी है।
यहां आपको बताते चलें इन सभी कहानियों की हिंदी लेखक परिवार के लिए रिकॉर्डिंग हो रही है।
मुख्य अतिथि दुर्गा जी ने विशेषांक की अतिथि संपादक एवम् पत्रिका की प्रधान संपादक को अंक के विषय के लिए तथा सभी वक्ताओं, समीक्षको, कहानीकारो के सुंदर समन्वयन के लिए आशीर्वाद दिया।
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षा गीतांजलि चटर्जी ने सभी रचयिता और समीक्षकों को धन्यवाद देते हुए नारी प्रोत्साहन की बात की। हिंदी लेखन में कालजयी नारी पात्रों के बारे में भी बताया।
“” पुरुष बलशाली हो सकता है मगर स्त्री शक्तिशाली है।”” अतः स्त्रियों को अपनी योग्यता की पहचान कर आगे की पंक्ति में आना होगा।
इसी संदेश के साथ नारी अस्मिता पत्रिका का विमोचन, विचार विमर्श समारोह नारी शक्ति की जगमगाहट के साथ सफलतापूर्वक अपने मुकाम पर पहुंचा।
