!! स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए करें:-‘योग!!
योग एक ऐसा शब्द है जिसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। योग और भारतीय संस्कृति परस्पर एक-दूसरे के पूरक हैं। वास्तव में योग एक ऐसा नियमित अभ्यास है जो शऱीर और मस्तिष्क दोनों को अविश्वसनीय तरीके से लाभ पहुंचाता है। योग शब्द की उत्पत्ति देववाणी संस्कृत मूल के ‘युज’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ होता है ‘जुड़ना’,’जोड़ना’ या ‘एकजुट होना’। कहने का आशय यह है कि जो मन,आत्मा और शरीर से अपने को सही अर्थों में जोड़ने का काम करें वास्तव में वहीं योग है।
वर्तमान समय में मनुष्य असंतुलन और अस्वस्थता के कारण अनेकों बीमारियों से घिरा हुआ रहता है एक ओर जहां आज चारों ओर जलवायु परिवर्तन का संकट है, वहीं वृद्धावस्था की बढ़ती उम्र में मनुष्य की जीवनशैली से जुड़ी अनेकों बीमारियाँ आये दिन बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर नया श्लोगन देता है विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का संदेश “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए करें:- योग” है हम देखते हैं कि मनुष्य अपनी बढ़ती उम्र में अनेकों बीमारियों से घिरा रहता है मनुष्य की बढ़ती उम्र में तथा शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय,स्वस्थ और स्वतंत्र रहने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने योग दिवस पर इस वर्ष का “वृद्धावस्था में स्वस्थ शरीर के लिए करें:-योग” का संदेश स्वस्थ,सक्रिय और स्वतंत्र रहने के लिए योग के महत्व पर जोर देता है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का इस वर्ष का इस संदेश का मुख्य आकर्षण: मनुष्य की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के दौरान शरीर में लचीलापन,मानसिक स्वास्थता और गतिशीलता बनाए रखने पर केंद्रित है।
भारतीय संस्कृति के अनुसार सौरमंडल में गृहों के दैनिक भ्रमण चक्र के अनुसार 21जून को पृथ्वी पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं जिस कारण 21 जून को सूर्य जल्दी उदय होता है और देर से ढलता है। इस दिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में किसी ग्रह के अक्ष का झुकाव उस तारे की ओर सबसे अधिक झुकाव होता है जिसकी वह परिक्रमा करता है। इस दिन सूर्य की सबसे ज्यादा रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है,जिस कारण 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य का तेज सबसे प्रभावी रहता है,और प्रकृति की सकारात्मक उर्जा सक्रिय रहती है। इस दिन की एक विशेष खासियत है कि वर्षभर के 365 दिनों में इस दिन योग करने से मनुष्य को लम्बा जीवन मिलता है। भारतीय परम्परा के अनुसार 21 जून को आध्यात्मिक ज्ञान के लिए बेहद अनुकूल माना गया है। आज दुनियाभर के देशों में योग को जीवन का श्रृंगार माना गया है। अगर पिछले कोरोना काल को देखा जाए तो पिछले कोविड प्रतिबंधों में लोग कई कारणों के चलते तनाव भरी जिंदगी जीने लगे थे। ऐसे समय में तनाव भरे जीवन से निजात पाने के लिए योग ने लोगों को न केवल अपने विवेक को बनाए रखने में मदद की बल्कि लोगों की पीड़ा और परेशानी को भी काफी हद तक कम किया है।
योग की उत्पत्ति हजारों साल पहले की है जब लोगों के बीच धर्म की कोई अवधारणा नहीं थी। वेदों के अनुसार
भारतीय संस्कृति में भगवान शिव को योग के जनक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ने ही इस चराचर सृष्टि जगत में योग विज्ञान की नींव डाली थी। 21 जून को योग दिवस मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहते हैं,कि इस सृष्टि में योग का पहला प्रसार भगवान शिव द्वारा अपने सात शिष्यों के बीच किया गया था। कहते हैं कि इन सप्त ऋषियों को ग्रीष्म संक्राति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा को भगवान शिव द्वारा अपने इन सप्त ऋषियों को योग की पहली दीक्षा प्राप्त हुई थी, जिसे शिव अवतरण के रुप में भी मनाते हैं। इसे दक्षिणायन के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा भी इस दिन को योगिक विज्ञान की शुरुआत का दिन माना जा सकता है। सूर्य के प्रकाश का संबंध सिर्फ गर्मी देने से नहीं है। इसका सम्बन्ध मनुष्य के आहार के साथ भी घनिष्ठता से जुड़ा है। आत्मबल की वृद्धि के लिए सूर्य को मजबूत करना आवश्यक है।
योग शरीर और मन का मिलन सिर्फ आसनों व प्राणायाम तक ही सीमित नहीं है,वरन् वह शारीरिक,मानसिक और भौतिक स्थिति को उसके उच्चतम स्तर पर ले जाने में सक्षम है। योग भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और मनुष्य के जीवन में योग एक स्वास्थ्य बीमा भी है, जो एक व्यक्ति और समाज को खुशहाली और समृद्धि की राह दिखाता है। योग विभिन्न आसन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा के माध्यम से शरीर और मन को नियंत्रित, स्थिर करने के साथ शांति प्रदान करता है। छात्रों के जीवन में योग का विशेष महत्व है। योग के अभ्यास से छात्रों का शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक अवस्था सुदृढ होती है। योगाभ्यास से जहां शरीर में लचीलापन आता है। वहीं व्यायाम और योग के माध्यम से शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है। चतुर्मुखी ज्ञान प्राप्त करने के लिए योग को शैक्षिक पाठ्यक्रम में विशेष रूप से सम्मिलित किया गया है।
योग को प्राचीन भारतीय कला का एक प्रतीक माना जाता है। भारतीय योग को जीवन में सकारात्मक और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। योग दिवस मनाने का हेतु लोगों में जन जागरुकता पैदा करने के साथ ही वर्तमान आपाधापी भरी जिंदगी में तनाव मुक्त होना भी है। मनुष्य के जीवन की सफलता में आत्मविश्वास और उच्च मनोबल का होना जरूरी होता है।
मानव जीवन में सूर्य का प्रभाव अत्यंत गहरा और बहुआयामी है। सूर्य पृथ्वी में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है जो जैविक चक्र,शारीरिक स्वास्थ्य,मानसिक स्थिति और ज्योतिषीय मान्यताओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आधुनिक विज्ञान कहता है कि जब सूर्य को प्रतिदिन जल चढ़ाया जाता है तो जलधारा के बीच उगते सूरज को देखने से मनुष्य की नेत्र ज्योति बढ़ती है, जलधारा के बीच से होकर आने वाली सूर्य की किरणें जब शरीर पर पड़ती हैं तो सूर्य की किरणों के रंगों का मनुष्य के शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी जैसे कई गुण विद्यमान होते हैं। इसलिए कहा गया है कि जो उगते सूर्य को जल चढ़ाता है उसमें सूर्य जैसा तेज बढ़ता है।
सूर्य का महत्व भारतीय ज्योतिष और सनातन संस्कृति में बहुत ऊंचा स्थान है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को व्यक्ति की आत्मा, पिता,समाज में मान-सम्मान, और सरकारी (उच्च) पद का कारक माना जाता है। जब सूर्य को प्रतिदिन जल चढ़ाया जाता है तो जलधारा के बीच उगते सूरज को देखने से मनुष्य की नेत्र ज्योति बढ़ती है, जलधारा के बीच से होकर आने वाली सूर्य की किरणें जब शरीर पर पड़ती हैं तो सूर्य की किरणों के रंगों का मनुष्य के शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी जैसे कई गुण विद्यमान होते हैं। इसलिए कहा गया है कि जो उगते सूर्य को जल चढ़ाता है उसमें सूर्य जैसा तेज बढ़ता है।
ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि जिस किसी की जन्म कुण्डली में सूर्य कमज़ोर स्थिति में रहता है सूर्य की कमजोर स्थिति वाले जातक को नित्यप्रति प्रातःकाल उगते सूर्य को जलअर्घ और सूर्य नमस्कार लगाना चाहिए। सूर्य के मजबूत होने से शरीर स्वस्थ और उर्जावान बना रहता है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में सूर्य मजबूत होता है,वे तेजस्वी, साहसी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं। योग में सूर्य नमस्कार को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सूर्य के मजबूत होने से सफलता के रास्ते में आने वाली सम्पूर्ण बाधाएं दूर होती हैं और मनुष्य का उच्च मनोबल तथा किसी भी कार्य की सफलता में आत्मविश्वास बना रहता है। जिस भी मनुष्य में आत्मविश्वास और उच्च मनोबल होता है,वह सभी तरह के कष्ट,विपत्तियों पर आसानी से विजय हासिल कर सकता है। इसके लिए नियमित योग क्रियाओं में सूर्य नमस्कार को और ज्योतिष विज्ञान में प्रातः कालीन सूर्य अर्घ्य को उत्तम माना गया है। कहा जाता है कि सूर्य के दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में बहुत लाभकारी होता है और योग भी आध्यात्मिक ज्ञान में ही आता है इसीलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत की आध्यात्मिक ज्ञान परम्परा में भारतीय योग विज्ञान को 21 जून,2015 से ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अगले दशक वर्षों के लक्ष्यों का समर्थन प्राप्त करने के लिए (2021-2030) का दशक स्वस्थ वृद्धावस्था दशक घोषित किया है। स्वस्थ वृद्धावस्था का दशक घोषित करने का उद्देश्य केवल जीवनकाल बढ़ाना नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य में बिताए गए जीवन के वर्षों को बढ़ाना है।
