रुड़की। वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, रुड़की में एक दिवसीय पंचपदीय शिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यालय के समस्त आचार्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धति के विविध आयामों का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यशाला में प्रशिक्षक श्रीमान राजीव शर्मा जी ने विद्या भारती की पंचपदीय शिक्षण पद्धति—अधिति, बोध, प्रयोग, अभ्यास एवं प्रचार-प्रसार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पद्धति नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप रुचिकर एवं आनंदमय शिक्षण को कक्षा-कक्ष में प्रभावी रूप से लागू करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, संस्कार, आत्मविश्वास, पसृजनात्मकता तथा जीवनोपयोगी दक्षताओं का समग्र विकास करती है।
कार्यशाला को सफल बनाने में विद्यालय के सह-प्रबंधक श्री पदम गिरी जी एवं प्रधानाचार्य डॉ. राजेश चौहान जी का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने आचार्यों का उत्साहवर्धन करते हुए गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।सभी आचार्यों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और सीखने का भरपूर आनंद लिया। साथ ही उन्होंने इन नवाचारपूर्ण गतिविधियों को अपनी कक्षाओं में विद्यार्थियों के साथ प्रभावी ढंग से संचालित करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
कार्यशाला के अंत में सभी आचार्यों ने पंचपदीय शिक्षण पद्धति एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण को अपने दैनिक शिक्षण कार्य का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सीखना रुचिकर, आनंदमय, सहभागितापूर्ण एवं जीवनोपयोगी बन सके।
