वास्तविकता– जी हां आज हम आप लोगों को बताने जा रहे हैं यह जो कॉकरोच अचानक से पैदा हो गए इनकी धरातल पर क्या वास्तविकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एकदम से मिलियन में एकत्रित होने वाले यह कॉकरोच धरना प्रदर्शन के समय मात्र सैकड़ो की संख्या में दिखाई दिए। आखिरकार देशी और विदेशी सभी कॉकरोच किधर चले गए।जैसा कि आप लोग जानते हैं हमारे घरों में यह ऐसे स्थान पर जहां पर कॉकरोच ज्यादा दिखाई देते हैं तो वंहा भी समूह में यदा-कदा ही दिखते हैं। कभी-कभी अचानक से कोई कॉकरोच बाहर निकल आता है और अपनी गंदगी फैलाता है। खाने पीने के समान को खराब करता है बीमारियां फैलता है और वापस भाग जाता है अगर उसको आभास होता है कि कोई उसकी तरफ को बढ़ रहा है या कोई वस्तु उसकी तरफ को आती है उसको प्रतीत होती है चाहे हवा ही चल जाए जोर से एक हवा का झोंका तीव्र गति से चल जाए और उस कॉकरोच को आभास हो जाए तो तुरंत वह दुम दबाकर वापस भाग जाता है। यही हालत कल के प्रदर्शन में हुए। बहुत से कॉकरोच तो अर्धनग्न अवस्था में दिखाई दिए। और यहां एक बात में और कहना चाहूंगा की जितनी संख्या कॉकरोच की नहीं थी उससे ज्यादा संख्या सोशल मीडिया चमकाने वालों की थी। चाहे वह यूट्यूबर हो या फिर सोशल मीडिया चैनल वाले। कॉकरोच को इनका धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने उनका संख्या बल बढ़ाया। इन कॉकरोच का उद्देश्य साफ है इनको देशहित के लिए कोई कार्य नहीं करना इनको इस प्रकार के सोशल मीडिया यूट्यूबरो को साथ लेकर या फिर सोशल मीडिया के माध्यम से अपने आप को चमका कर कोई ना कोई राजनीतिक लाभ लेना उनकी प्राथमिकता है। पहले भी बहुत बार भारतवर्ष की जनता को ठगा जा चुका है इसी प्रकार के लोगों के द्वारा लेकिन अब समय बदल चुका है। कन्हैया कुमार और केजरीवाल जैसों का समय जा चुका है। इन लोगों के पास कोई ठोस रणनीति भी नहीं है और ना ही कोई उद्देश्य है।सोशल मीडिया पर अपने आप को कॉक्रोच पार्टी का सदस्य बताने वाले और भविष्य में कॉकरोच पार्टी के नेतृत्व में बड़े पद पर आसीन होने का सपना देखने वाले वह बड़े कॉकरोच नेता भी इस धरना प्रदर्शन में कहीं दिखाई नहीं दिए। सच्चाई यह है दोस्तों इस प्रकार का प्रोपेगेंडा चलाने वाले ए सी में बैठकर लोगों को मोटिवेट करते हैं आम जनता को बरगलाने का काम करते हैं। जब कहीं तपती धूप में धरना प्रदर्शन करना हो या फिर कहीं बलिदान देना हो तो यह आक्रामक भाषण देकर भोली भाली जनता को सड़कों पर उतारकर अपने आप ए सी ऑफिस में या होटल में आनंद लेते हैं यह घटनाक्रम भी यही दर्शाता है अगर यह लोग वास्तव में सही होते तो जनता इनके साथ होती यकीन मानो दोस्तों आज के इस युग में हमें कॉकरोच बनने की आवश्यकता नहीं है कॉकरोच को पूरे विश्व में कहीं भी पसंद नहीं किया जाता। संगठन वही फलीभूत होता है जिसका कोई निस्वार्थ उद्देश्य होता है। आपका अपना– मुनीश शर्मा। धन्यवाद।
