17 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीण लामबंद
पहांसू में हुई बैठक में ग्रामीणों ने एकमत होकर प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का विरोध किया
रामपुर मनिहारान/पहांसू, 7 सितंबर 2026।
रामपुर मनिहारान तहसील क्षेत्र के 17 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि को प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र/पार्क के लिए अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया के विरोध में ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इसी क्रम में ग्राम पहांसू में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र के किसानों एवं ग्रामीणों ने एकमत होकर प्रस्तावित परियोजना का विरोध करने का निर्णय लिया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जिन गांवों की भूमि प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए ली जा रही है, वह क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि है और हजारों परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि का अधिग्रहण होने से न केवल किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सामने भी गंभीर संकट उत्पन्न होगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन को अधिग्रहित किया जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित परियोजना को रोकने के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से हर संभव कदम उठाया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर सभी 17 गांवों के ग्रामीणों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि रामपुर मनिहारान तहसील के 17 गांवों में नवीन सुनियोजित औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैठक में श्री प्रदीप कुमार प्रधान, श्री जय कुमार पूर्व प्रधान, श्री राजकुमार पूर्व प्रधान, एडवोकेट राजपाल सिंह, चौधरी राजपाल सिंह, चौधरी राजेश्वर सिंह, श्री अरुण सिंह (अन्नू), श्री विकास पंवार, श्री विक्रांत योगी, श्री पुनीत पंवार, श्री विशाल पंवार (शालू), श्री विनीत पंवार एवं श्री गगन पंवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने कहा कि 17 गांवों के किसान और ग्रामीण अपने अधिकार, अपनी जमीन और अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट हैं। बैठक में सभी ने संकल्प लिया कि बिना ग्रामीणों की सहमति और उनकी समस्याओं का उचित समाधान किए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
17 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
किसानों एवं ग्रामवासियों की वास्तविक आपत्तियों और समस्याओं को सुना जाए।
परियोजना के सामाजिक एवं कृषि प्रभाव का समुचित आकलन किया जाए।
ग्रामीणों की सहमति एवं हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
यदि परियोजना आवश्यक हो तो उपजाऊ कृषि भूमि के स्थान पर वैकल्पिक भूमि पर विचार किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 17 गांवों के ग्रामीण सामूहिक रूप से आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे।
